मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की अंतिम सूची जारी करने पर न्यायालय ने लगी रोक


www.newsjobmp.com--मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 14 फीसद से अधिक आरक्षण पर पूर्व में लगाई गई रोक बरकरार रखी गई।  जबलपुर स्थित मुख्य पीठ के प्रशासनिक न्यायाधीश संजय यादव और जस्टिस बीके श्रीवास्तव की युगलपीठ ने राज्य शासन को इस शर्त पर शिक्षक चयन प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी है कि इस प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा।  मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।  जबलपुर निवासी छात्रा आकांक्षा दुबे व अन्य ने मप्र सरकार के आठ मार्च 2019 को जारी संशोधन अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।  इसमें कहा गया कि संशोधन के कारण प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़कर 27 फीसद हो गया है।  इससे कुल आरक्षण का प्रतिशत 50 से बढ़कर 63 हो गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत किसी भी सूरत में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता है।  राजस्थान निवासी शांतिलाल जोशी सहित पांच छात्रों ने एक अन्य याचिका में कहा कि 28 अगस्त 2018 को मप्र सरकार ने  स्कूल शिक्षकों के लिए विज्ञापन प्रकाशित कर भर्ती परीक्षा कराई । निर्देशिका जारी कर दी 20 जनवरी 2020 को इस संबंध में सरकार ने इन पदों पर भी 27 फीसद ओबीसी आरक्षण लागू करने की नियम निर्देशिका जारी कर दी । याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी कि भर्ती प्रक्रिया 2018 में आरंभ हुई , लेकिन राज्य सरकार ने 2019 का अध्यादेश इसमें लागू किया । यह अनुचित है ।

मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में चयनित उम्मीदवारों को करना पड़ सकता है लंबा इंतजार

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में चयन सूची एवं प्रतीक्षा सूची जारी होने के बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया चालू की गई थी लेकिन कोरोनावायरस के कारण इसको अभी फिलहाल स्थगित कर दिया गया है
शिक्षक चयनित सूची एवं प्रतीक्षा सूची 27% ओबीसी आरक्षण के अनुसार जारी की गई है, फिर न्यायालय के आदेश अनुसार 27% आरक्षण के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ती रहेगी लेकिन जब तक न्यायालय द्वारा इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता तब तक अंतिम चयन सूची जारी नहीं की जा सकती और ना जॉइनिंग दी जा सकती
अगर न्यायालय द्वारा 27% आरक्षण को अमान्य किया गया तो फिर पुनः शिक्षक भर्ती चयन सूची एवं प्रतीक्षा सूची को नए सिरे से बनाकर जारी करना पड़ेगा,
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि अभी शिक्षक भर्ती में चयनित उम्मीदवारों को जॉइनिंग के लिए काफी इंतजार करना पड़ सकता क्योंकि मध्य प्रदेश में उपचुनाव से पहले नहीं लगता कि यह आरक्षण मामले का निपटारा होगा
शिक्षक भर्ती में चयनित उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि सरकार हम युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है
प्रदेश में 9 साल बाद शिक्षक भर्ती हो रही है और वह भी कई मामलों में उलझ कर रह गई है कई लोगों ने अपनी वर्तमान नौकरी छोड़कर शिक्षक भर्ती के इंतजार में महीनों से खाली बैठे हैं
सोशल मीडिया पर भी लगातार चयनित अभ्यर्थी जल्दी भर्ती प्रक्रिया कराने की मांग करते रहते हैं




10 % आरक्षण के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा
इसी तरह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने को चुनौती देने वाली ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन व अन्य की याचिकाओं पर युगलपीठ ने सरकार को जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं । इन याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह पैरवी कर रहे हैं ।



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www.newsjobmp.com-- Madhya Pradesh High Court upheld earlier ban on reservation for Other Backward Classes (OBC) above 14%.  The Couple Bench of Jabalpur's Chief Justice Administrative Judge Sanjay Yadav and Justice BK Srivastava have allowed the state government to continue the teacher selection process on the condition that the process will not be finalized.  The next hearing of the case will be on August 18.  Jabalpur resident Akanksha Dubey and others have challenged the amendment ordinance issued on 8 March 2019 by the Madhya Pradesh government in the High Court.  It said that due to the amendment, the OBC reservation in the state has increased from 14 to 27 percent.  With this, the percentage of total reservation has increased from 50 to 63, while under the directions of the Supreme Court, no reservation can be implemented in more than 50 percent.  In another petition, five students including Shantilal Joshi, a resident of Rajasthan, said that on 28 August 2018, the Madhya Pradesh government published an advertisement for school teachers and conducted the recruitment examination.  The directory was released on January 20, 2020, in this regard, the government also issued a rule guide for implementing 27 percent OBC reservation on these posts.  The petitioners' lawyers argued that the recruitment process started in 2018, but the state government implemented the 2019 ordinance in it.  this is unfair .

 Selected candidates may have to wait long in Madhya Pradesh teacher recruitment process

 It is worth mentioning that after the release of the selection list and waiting list in the Madhya Pradesh teacher recruitment process, the process of document verification was started but due to coronavirus, it has been postponed for now.
 Teacher selected list and waiting list has been released according to 27% OBC reservation, then according to the order of the court, according to 27% reservation, the process will continue but the final selection list will not continue until the final decision is taken by the court.  Can be done or not joining
 If 27% reservation has been invalidated by the court, then again the teacher recruitment selection list and waiting list will have to be issued afresh,
 Overall, it can be said that right now the candidates selected in the teacher recruitment may have to wait a long time for joining because in Madhya Pradesh, before the by-election it does not feel that this reservation case will be settled.
 Selected candidates in teacher recruitment alleged that the government is playing with the future of our youth
 After 9 years the teacher is getting recruited in the state and she is also confused in many cases, many people have left their current jobs and have been sitting vacant for months waiting for teacher recruitment.
 On social media too, constantly selected candidates keep demanding to get the recruitment process done quickly.

Asked the government for answers on the issue of 10% reservation
 Similarly, on the petitions of the OBC Advocates Welfare Association and others challenging the 10% reservation for economically weaker sections, the couple has directed the government to submit a reply.  Advocate Rameshwar P Singh is appearing on behalf of these petitioners.